Acharya Ramchandra Shukla Essays About Education

Ram Chandra Shukla, known as the first codifier of the history of Hindi literature, was born on 4 October, 1884, to a wealthy Brahmin family in Agona village, Basti, Uttar Pradesh. He is better known as Acharya Shukla and is a renowned personality for creating a scientific system by using wide, e

Ram Chandra Shukla, known as the first codifier of the history of Hindi literature, was born on 4 October, 1884, to a wealthy Brahmin family in Agona village, Basti, Uttar Pradesh. He is better known as Acharya Shukla and is a renowned personality for creating a scientific system by using wide, empirical research with scant resources to codify the Hindi language. His book on the Hindi language, Sahitya Ka Itihaas (1928-29) is considered to be a much sought after reference for the language.


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आचार्य रामचन्द्र शुक्ल हिन्दी आलोचना के अधिनायक आचार्य हैं । बीसवीं शताब्दी की आलोचना और साहित्येतिहास लेखन में जितना आचार्य शुक्ल को विभिन्न मत-मतान्तरों के तहत पक्ष-विपक्ष में उद्धृत किया गया है उतना किसी दूसरे आलोचक और इतिहासकार को नहीं 1 शुक्ल जी ने हिन्दी आलोचना और इतिहास को एक जाग्रत सामाजिक-साहित्यिक दिशाबोध प्रदान किया । वे सच्चे अर्थों में एक लोकधर्मी प्रगतिशील आलोचक थे । शुक्ल जी की पहचान एक विचारपरक, दृष्टि- सजग, वैज्ञानिक चेतना सम्पन्न निबन्धकार की है । उनके निबन्धों का वितान व्यापक है । साहित्य, कला, धर्म, भाषा, संस्कृति, राजनीति, अर्थनीति, समाज-चिन्ता, राष्ट्रबोध इत्यादि सभी विषयों पर उन्होंने विचारपूर्ण, अर्थगर्भित निबंधों/लेखों की रचना की है । गद्य विधा में निबन्ध को महत्वपूर्ण विचार विनिमय के एक गम्भीर माध्यम के रूप में स्थापित करने का श्रेय आचार्य शुक्ला को है । शुक्ल जी के द्वारा विविध विषयों पर लिखे श्रेष्ठ साहित्यिक और वैचारिक निबंधों का चयन इस पुस्तक का प्रेय है । संकलित निबंधों में शुक्ल जी के शास्त्र और समाज दोनों का निदर्शन अपने मुकम्मल परिपाक में एक साथ मिलता है ।

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